पंचांग — काशी / वाराणसी (बनारस)
किसी भी तारीख व स्थान का विक्रम संवत पंचांग देखें। समय व स्थान (अक्षांश/देशांतर व समय-क्षेत्र) के अनुसार सूर्योदय, तिथि व मुहूर्त की गणना होती है — इसलिए पहले अपना स्थान चुनें।
तारीख: 30-10-2026 | वार: शुक्रवार (स्वामी: शुक्र)
विक्रम संवत: 2083 | शक संवत: 1948
मास: कार्तिक | पक्ष: कृष्ण पक्ष
सूर्य राशि: तुला | चंद्र राशि: मिथुन
पंचांग के पाँच अंग
1. तिथि
कृष्ण पक्ष पंचमी
समाप्ति: 19:27 बजे
वर्ग: पूर्णा
विद्या, धन व औषधि कार्य हेतु शुभ।
2. वार
शुक्रवार
स्वामी ग्रह: शुक्र
प्रेम, कला, वाहन, आभूषण व सुख के कार्य हेतु शुभ।
3. नक्षत्र
मृगशिरा (पाद 4)
स्वामी: मंगल | समाप्ति: 09:05 बजे
यात्रा, वस्त्र-आभूषण व मांगलिक कार्य हेतु शुभ।
4. योग
शिव
समाप्ति: 20:42 बजे
यह योग शुभ कार्यों हेतु अनुकूल है।
5. करण
कौलव
समाप्ति: 08:48 बजे
मित्रता व संबंध के कार्य हेतु शुभ।
सूर्य व चंद्रमा की आकाश में स्थिति
नीचे चुने गए समय (21:14) पर सूर्य ☀ व चंद्रमा ☾ आकाश में कहाँ हैं — साथ ही दिन भर उनका मार्ग दिखाया गया है। बाईं ओर पूर्व, बीच में दक्षिण, दाईं ओर पश्चिम।
☀ सूर्य: क्षितिज के नीचे (दिखाई नहीं दे रहा)
☾ चंद्रमा: ऊँचाई 2°, दिशा ईशान (उत्तर-पूर्व)
| सूर्योदय | 06:04 | सूर्यास्त | 17:19 |
| मध्याह्न | 11:40 | चंद्र कला | 80% (कृष्ण पक्ष — चंद्र घट रहा है) |
| चंद्रोदय | 21:03 | चंद्रास्त | 10:28 |
शुभ व अशुभ मुहूर्त
| ब्रह्म मुहूर्त (शुभ) | 04:28 – 05:16 |
| अभिजीत मुहूर्त (शुभ) | 11:19 – 12:04 |
| राहु काल (अशुभ) | 10:17 – 11:41 |
| यमगण्ड (अशुभ) | 14:30 – 15:54 |
| गुलिक काल (अशुभ) | 07:29 – 08:53 |
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
| चल | मध्यम | 06:04 – 07:29 |
| लाभ | शुभ | 07:29 – 08:53 |
| अमृत | शुभ | 08:53 – 10:17 |
| काल | अशुभ | 10:17 – 11:41 |
| शुभ | शुभ | 11:41 – 13:06 |
| रोग | अशुभ | 13:06 – 14:30 |
| उद्वेग | अशुभ | 14:30 – 15:54 |
| चल | मध्यम | 15:54 – 17:19 |
रात का चौघड़िया
| रोग | अशुभ | 17:19 – 18:54 |
| उद्वेग | अशुभ | 18:54 – 20:30 |
| चल | मध्यम | 20:30 – 22:06 |
| लाभ | शुभ | 22:06 – 23:41 |
| अमृत | शुभ | 23:41 – 01:17 |
| काल | अशुभ | 01:17 – 02:53 |
| शुभ | शुभ | 02:53 – 04:29 |
| रोग | अशुभ | 04:29 – 06:04 |
इस दिन शुभ कार्यों की उपयुक्तता
| कार्य | नक्षत्र | वार | तिथि | निर्णय |
|---|---|---|---|---|
| विवाह | ✓ | ✓ | ✓ | शुभ |
| गृह प्रवेश | ✓ | ✓ | ✓ | शुभ |
| तिलक / सगाई | ✓ | ✓ | ✓ | शुभ |
| मुंडन | ✓ | ✓ | ✓ | शुभ |
| नामकरण | ✓ | ✓ | ✓ | शुभ |
| वाहन खरीद | ✓ | ✓ | ✓ | शुभ |
| व्यापार आरंभ | — | ✓ | ✓ | मध्यम |
⚠ यह केवल सामान्य मार्गदर्शन है। विवाह, गृह प्रवेश आदि का निश्चित मुहूर्त लग्न, ग्रह-स्थिति व व्यक्तिगत कुंडली देखकर ही तय होता है। कृपया गुरुजी से पुष्टि अवश्य करें।
संदर्भ — सभी तिथि, करण व अन्य विवरण (सरल हिंदी में)
सभी तिथियाँ (१–१५ + पूर्णिमा/अमावस्या)
| तिथि | वर्ग | विवरण |
|---|---|---|
| प्रतिपदा | नन्दा | शुभ कार्य आरंभ, नींव व यात्रा हेतु उत्तम। |
| द्वितीया | भद्रा | स्थायी कार्य व आधारशिला रखने हेतु अच्छी। |
| तृतीया | जया | मंगल कार्य, आभूषण व वस्त्र हेतु शुभ। |
| चतुर्थी | रिक्ता | रिक्ता तिथि; विघ्न हटाने के कार्य; शुभ कार्य में त्याज्य। |
| पंचमी | पूर्णा | विद्या, धन व औषधि कार्य हेतु शुभ। |
| षष्ठी | नन्दा | उत्सव, साहस व प्रतियोगिता के कार्य। |
| सप्तमी | भद्रा | यात्रा व चल कार्य हेतु उत्तम। |
| अष्टमी | जया | शक्ति, रक्षा व शस्त्र संबंधी कार्य। |
| नवमी | रिक्ता | रिक्ता/उग्र तिथि; शुभ कार्य में त्याज्य। |
| दशमी | पूर्णा | धर्म व शुभ कार्य हेतु श्रेष्ठ। |
| एकादशी | नन्दा | व्रत, उपवास व आध्यात्मिक कार्य हेतु उत्तम। |
| द्वादशी | भद्रा | धार्मिक व दान कार्य हेतु शुभ। |
| त्रयोदशी | जया | मित्रता, उत्सव व सुख के कार्य। |
| चतुर्दशी | रिक्ता | उग्र/रिक्ता; तांत्रिक कार्य; शुभ कार्य में त्याज्य। |
| पूर्णिमा | पूर्णा | पूर्ण चंद्र; दान, पूजा व मांगलिक कार्य हेतु श्रेष्ठ। |
| अमावस्या | पूर्णा | पितृ कार्य व तर्पण हेतु; मांगलिक कार्य में त्याज्य। |
तिथि वर्ग: नन्दा (आनंद), भद्रा (कल्याण), जया (विजय), रिक्ता (शुभ कार्य में त्याज्य), पूर्णा (पूर्णता)।
सभी करण (११)
| करण | विवरण |
|---|---|
| बव | शुभ व स्थायी कार्य हेतु उत्तम। |
| बालव | धार्मिक व विद्या कार्य हेतु अच्छा। |
| कौलव | मित्रता व संबंध के कार्य हेतु शुभ। |
| तैतिल | मंगल व राजकीय कार्य हेतु उत्तम। |
| गर | कृषि व भवन निर्माण के कार्य हेतु अच्छा। |
| वणिज | व्यापार व लेन-देन हेतु श्रेष्ठ। |
| विष्टि (भद्रा) | अशुभ; शुभ व मांगलिक कार्य वर्जित। |
| शकुनि | औषधि व मंत्र साधना हेतु उपयुक्त। |
| चतुष्पाद | पशु व गौ संबंधी कार्य हेतु अच्छा। |
| नाग | कठोर व स्थायी कार्य; सावधानी आवश्यक। |
| किंस्तुघ्न | शुभ कार्य आरंभ हेतु अच्छा। |
सभी नक्षत्र (२७)
| नक्षत्र | स्वामी | विवरण |
|---|---|---|
| अश्विनी | केतु | यात्रा, औषधि व शीघ्र कार्य हेतु शुभ। |
| भरणी | शुक्र | उग्र; कठोर व संहारक कार्य; शुभ में सावधानी। |
| कृत्तिका | सूर्य | अग्नि व तीक्ष्ण कार्य; शुभ में सावधानी। |
| रोहिणी | चंद्र | विवाह, गृह प्रवेश व सभी मांगलिक कार्य हेतु श्रेष्ठ। |
| मृगशिरा | मंगल | यात्रा, वस्त्र-आभूषण व मांगलिक कार्य हेतु शुभ। |
| आर्द्रा | राहु | उग्र/तीक्ष्ण कार्य; शुभ कार्य में त्याज्य। |
| पुनर्वसु | गुरु | यात्रा, गृह व पुनः आरंभ के कार्य हेतु शुभ। |
| पुष्य | शनि | अत्यंत शुभ; व्यापार व अधिकांश कार्य हेतु श्रेष्ठ (विवाह को छोड़कर)। |
| अश्लेषा | बुध | तीक्ष्ण; मंत्र व औषधि कार्य; शुभ में सावधानी। |
| मघा | केतु | पितृ कार्य व विवाह हेतु शुभ। |
| पूर्वा फाल्गुनी | शुक्र | विवाह, प्रेम व कला के कार्य हेतु अच्छा। |
| उत्तरा फाल्गुनी | सूर्य | विवाह व सभी स्थायी शुभ कार्य हेतु श्रेष्ठ। |
| हस्त | चंद्र | व्यापार, विद्या व हस्तकला के कार्य हेतु शुभ। |
| चित्रा | मंगल | निर्माण, कला व आभूषण के कार्य हेतु शुभ। |
| स्वाति | राहु | व्यापार, यात्रा व वाहन के कार्य हेतु उत्तम। |
| विशाखा | गुरु | मिश्र; धैर्य वाले कार्य; शुभ में सावधानी। |
| अनुराधा | शनि | विवाह, मित्रता व यात्रा हेतु श्रेष्ठ। |
| ज्येष्ठा | बुध | तीक्ष्ण; साहस के कार्य; शुभ में सावधानी। |
| मूल | केतु | उग्र; औषधि व मंत्र कार्य; विवाह विशेष मुहूर्त में। |
| पूर्वाषाढ़ा | शुक्र | जल व यात्रा के कार्य हेतु अच्छा। |
| उत्तराषाढ़ा | सूर्य | विवाह, गृह प्रवेश व स्थायी शुभ कार्य हेतु श्रेष्ठ। |
| श्रवण | चंद्र | विद्या, यात्रा व धार्मिक कार्य हेतु शुभ। |
| धनिष्ठा | मंगल | संगीत, वाहन व उत्सव के कार्य हेतु शुभ। |
| शतभिषा | राहु | औषधि व तकनीकी कार्य; शुभ में सावधानी। |
| पूर्वा भाद्रपद | गुरु | उग्र; तांत्रिक व कठोर कार्य; शुभ में त्याज्य। |
| उत्तरा भाद्रपद | शनि | विवाह, गृह व धार्मिक कार्य हेतु श्रेष्ठ। |
| रेवती | बुध | यात्रा, व्यापार व सभी मांगलिक कार्य हेतु शुभ। |
सभी योग (२७)
| योग | स्वभाव |
|---|---|
| विष्कम्भ | सावधानी |
| प्रीति | शुभ |
| आयुष्मान | शुभ |
| सौभाग्य | शुभ |
| शोभन | शुभ |
| अतिगण्ड | सावधानी |
| सुकर्मा | शुभ |
| धृति | शुभ |
| शूल | सावधानी |
| गण्ड | सावधानी |
| वृद्धि | शुभ |
| ध्रुव | शुभ |
| व्याघात | सावधानी |
| हर्षण | शुभ |
| वज्र | सावधानी |
| सिद्धि | शुभ |
| व्यतीपात | सावधानी |
| वरीयान | शुभ |
| परिघ | सावधानी |
| शिव | शुभ |
| सिद्ध | शुभ |
| साध्य | शुभ |
| शुभ | शुभ |
| शुक्ल | शुभ |
| ब्रह्म | शुभ |
| ऐन्द्र | शुभ |
| वैधृति | सावधानी |
सभी वार (७)
| वार | स्वामी | विवरण |
|---|---|---|
| रविवार | सूर्य | नेतृत्व, राजकीय व पिता संबंधी कार्य हेतु शुभ। |
| सोमवार | चंद्र | जल, यात्रा, विवाह व कोमल कार्यों हेतु उत्तम। |
| मंगलवार | मंगल | साहस, भूमि व विवाद के कार्य; शुभ कार्य में सावधानी। |
| बुधवार | बुध | विद्या, व्यापार, लेखन व बुद्धि के कार्य हेतु श्रेष्ठ। |
| गुरुवार | बृहस्पति | धर्म, विवाह, शिक्षा व शुभ कार्यों हेतु सर्वोत्तम। |
| शुक्रवार | शुक्र | प्रेम, कला, वाहन, आभूषण व सुख के कार्य हेतु शुभ। |
| शनिवार | शनि | लोहा, सेवा व स्थायी कार्य; शुभ कार्य में सावधानी। |
गणना खगोलीय सूत्रों (लाहिरी अयनांश) पर आधारित है और सामान्य उपयोग हेतु पर्याप्त सटीक है। किसी विशेष मुहूर्त की पुष्टि गुरुजी से करें।